पियुष राय ने मां के चरणों में सौंपी पिता की वरासत

गाजीपुर। भाजपा विधायक स्व. कृष्णानंद राय के पुत्र पियुष राय विधानसभा चुनाव में काफी सुर्खियों में रहें। मुहम्मदाबाद विधानसभा से उनकी मां पूर्व विधायक अलका राय चुनाव लड़ रही थीं। भाजपा से अलका राय को उम्मीदवार बनाये जाने के पहले से ही पियुष राय अपने बड़े भाई आनंद राय मुन्ना के साथ क्षेत्र को मथ रहे थे। इस विधानसभा चुनाव में अंसारी हाउस के भी युवराज काफी सक्रिय थे। मुहम्मदाबाद के पूर्व विधायक शिवगतुल्लाह अंसारी के पुत्र शोएब अंसारी उर्फ मन्नू भी अपने पिता के ​चुनाव प्रचार की कमान संभाले हुए थे। मन्नू जहां गाड़ियों के काफिले व संगीनों के साये में अपने परंपरागत पारिवारिक बैकग्राउंड के हिसाब से क्षेत्र में घूम रहे थे, वहीं स्व. कृष्णानंद राय का पुत्र पियुष राय अपनी सादगी व मिलनसार व्यक्तित्व के सहारे अपने पिता की खोई हुई राजनीतिक जमीन को अपनी मां अलका राय के चरणों में सौंपने के लिए बेताब थे। दोनों परिवारों के युवराजों का फैसला भी इस चुनाव में होना था क्योंकि अंसारी बंधुओं के तरफ से भी अपने नये जनरेशन को जोश—खरोश से मैदान में प्रोजेक्ट किया गया था। चुनाव परिणाम ने जहां स्व. कृष्णानंद राय के पुत्र पियुष को उनकी राजनीतिक वरासत का युवराज बनाया, वहीं अंसारी बंधुओं का यूथ ब्रिगेड मुंह को खाता हुआ दिखा। मुहम्मदाबाद विधानसभा से लेकर घोसी तक उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। मउ की घोसी विधानसभा से मुख्तार अंसारी के पुत्र अब्बास बसपा के हाथी पर सवार होकर चुनाव मैदान में उतरे थे लेकिन उन्हें भाजपा के उम्मीदवार फागू चौहान से शिकस्त खानी पड़ी।
गौरतलब हो कि 2005 में वर्तमान विधायक स्व. कृष्णानंद राय को भांवरकोल थाना क्षेत्र के बसनिया पुलिया के पास उनके छह साथियों सहित अत्याधुनिक असलहों से अंधाधुंध फायरिंग कर हत्यारों ने उन्हें मौत के घाट उतार दिया था। उसके बाद हुए उपचुनाव में अलका राय ​मुहम्मदाबाद विधानसभा से निर्वाचित हुई थीं। 2007 के विधानसभा चुनाव में बाहुबली ​मुख्तार अंसारी के भाई शिवगतुल्लाह अंसारी ने सपा के बैनर तले चुनाव लड़ते हुए अलका राय को दो हजार मतों से हरा दिया था। उसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में अलका राय चुनाव मैदान में नहीं उतरी थीं। तभी से मुहम्मदाबाद विधानसभा सीट अफजाल अंसारी के बाद शिवगतुल्लाह अंसारी के कब्जे में थी। 2017 के विधानसभा चुनाव में स्व. कृष्णानंद राय का परिवार पूरे जोश—खरोश से मैदान में उतर गया था। पहले उनके भतीजे आनंद शंकर राय मुन्ना को उनकी फैमिली मैदान में उतारना चाहती थी, लेकिन भाजपा हाईकमान ने स्व. कृष्णानंद राय की पत्नी अलका राय पर ही दांव लगाना मुनासिब समझा और मुहम्मदाबाद की जनता ने अलका राय को भारी मतों से जीत दिलाई है।